CJP Protest: Supreme Court Quashes FIRs Against Student Protesters, Know What Happened
नई दिल्ली: CJP आंदोलन से जुड़े छात्र प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित कई एफआईआर को समाप्त करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपने प्रदर्शन मार्च को वापस लेने का फैसला किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई 2026 के दौरान हुए प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर को समाप्त करने का आदेश दिया।
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने कहा कि जो युवा प्रदर्शनकारी bona fide यानी वास्तविक उद्देश्य से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे, उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले में अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करना उचित है।
किन राज्यों से जुड़े मामले थे?
सुप्रीम कोर्ट के सामने दिल्ली पुलिस के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी एफआईआर समाप्त करने के लिए आवेदन किए गए थे।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि 20 से 25 जुलाई 2026 के इन्हीं प्रदर्शनों से संबंधित कोई अन्य एफआईआर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज है और उसे अदालत के सामने औपचारिक रूप से नहीं लाया गया है, तो उसे भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और बंद माना जाएगा। साथ ही इन्हीं घटनाओं के संबंध में नई एफआईआर दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया गया।
2,873 लोगों को लेकर क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी रखा गया है। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि प्रदर्शन स्थल पर 2,873 ऐसे लोग मौजूद थे जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी थी।
इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, बलात्कार और POCSO जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले बताए गए थे।
अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को इन लोगों के संबंध में कानून के अनुसार नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। यानी सुप्रीम कोर्ट का आदेश गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के लिए सामान्य छूट नहीं है।
CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च क्यों रद्द किया?
CJP की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में एक और विरोध मार्च की घोषणा की गई थी। संगठन का कहना था कि जुलाई के आंदोलन के बाद सरकार की ओर से किए गए वादों में से कई मांगें अभी पूरी नहीं हुई थीं।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा एफआईआर से जुड़ी बड़ी राहत दिए जाने के बाद CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत के सामने 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि सरकार की सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश के बाद संगठन मार्च वापस ले रहा है तथा आगे अदालत के आदेश के अनुपालन की उम्मीद करता है।
सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में सरकार का पक्ष रखा। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी कहा था कि CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी, हालांकि गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों को लेकर अलग कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके खिलाफ जुलाई के प्रदर्शन के दौरान एफआईआर दर्ज हुई थी। अदालत ने अपने आदेश में युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखने की बात कही है।
इस फैसले से प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों को आपराधिक मुकदमों की चिंता से राहत मिल सकती है। हालांकि गंभीर आपराधिक मामलों वाले व्यक्तियों के संबंध में कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।
CJP आंदोलन में अब आगे क्या होगा?
एफआईआर से जुड़ी मुख्य मांग पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लिया जा चुका है।
वहीं, छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने से जुड़ा मुद्दा अभी अलग प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना है। केंद्र सरकार को छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की नीति और उसकी प्रक्रिया तैयार करने के लिए समय दिया गया है।
निष्कर्ष
CJP आंदोलन से जुड़े छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बड़ी कानूनी राहत के रूप में सामने आया है। अदालत ने 20 से 25 जुलाई 2026 के प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को समाप्त करने का आदेश दिया और भविष्य में उन्हीं घटनाओं पर नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक लगाई।
इसके बाद CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस ले लिया। हालांकि गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े 2,873 लोगों के संबंध में कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है। अब सभी की नजरें सरकार द्वारा मुआवजे की नीति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आगे होने वाले अनुपालन पर हैं।
Disclaimer: यह ब्लॉग पोस्ट उपलब्ध सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। कानूनी मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित न्यायालय के आधिकारिक आदेश और रिकॉर्ड से निर्धारित होती है।