Supreme Court Quashes FIRs Against Student Protesters

1 सितंबर 2026 को Supreme Court ने CJP से जुड़े 20–25 जुलाई 2026 के छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIRs को लेकर बड़ा आदेश दिया। Court ने Article 142 के तहत छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को बंद करने का आदेश दिया, हालांकि गंभीर आपराधिक antecedents वाले कुछ व्यक्तियों के लिए अपवाद रखा गया। इसके बाद CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया।

Greater Noida Student Receives ₹5 Lakh Bond Notice

इसके कुछ दिन बाद 4 सितंबर 2026 को Greater Noida के Executive Magistrate ने Gautam Buddha University के second-year law student Akshat Tripathi को notice जारी किया। Notice में ₹5 लाख का personal bond और ₹5 लाख के दो sureties देने की मांग की गई थी। Police report में आरोप लगाया गया कि वह छात्रों को CJP के प्रस्तावित protest में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। Tripathi ने इन आरोपों से इनकार किया।

Example: What Happened To The Notice

5 सितंबर 2026 को यह notice वापस ले लिया गया। इसके बाद मामला Supreme Court के सामने उठाया गया। Court ने सवाल किया कि जब उसके 1 सितंबर के आदेश में छात्रों के खिलाफ coercive action नहीं लेने की बात कही गई थी, तो ऐसा notice कैसे जारी हुआ।

Executive Magistrate Was Later Suspended

10 सितंबर 2026 को Supreme Court को बताया गया कि जिस Executive Magistrate ने student को notice जारी किया था, उसे suspend कर दिया गया है। यह जानकारी Solicitor General Tushar Mehta ने Court को दी।

इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि Supreme Court की आपत्ति notice जारी करने की प्रक्रिया और उसके पहले के आदेश के साथ उसके संबंध को लेकर थी। Court ने अधिकारियों से explanation की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई।

Supreme Court Also Addressed Minor Girl Protection

इसी CJP protest litigation में Supreme Court ने एक 14 वर्षीय लड़की, जिसने CJP के Jantar Mantar protest में भाग लिया था, को कथित harassment और intimidation से जुड़े आरोपों पर भी संज्ञान लिया। Court ने कहा कि लड़की और उसके परिवार को आवश्यक protection दिया जाना चाहिए।

Important: यह खबर किसी नए CJP protest की घोषणा नहीं है। मुख्य घटनाएं 1–10 सितंबर 2026 के बीच Supreme Court proceedings से संबंधित हैं। उपलब्ध न्यायिक और समाचार रिपोर्टों के अनुसार FIRs, student notice, notice withdrawal और Executive Magistrate के suspension को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना चाहिए।